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बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के तरीके
अगर आप पहली बार मां बनी हैं, तो संà¤à¤µ है कि आपके लिठशिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो रहा होगा। à¤à¤¸à¤¾ होना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• à¤à¥€ है। इस दौरान नई मां से अनजाने में कà¥à¤› गलतियां à¤à¥€ हो सकती हैं। हो सकता है कि आपके मन में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कई सवाल होंगे, जिनके जवाब तलाशने का आप पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर रही होंगी। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम आपके à¤à¤¸à¥‡ ही कà¥à¤› खास सवालों के जवाब लेकर आठहैं। हम आपको बताà¤à¤‚गे कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान मां को किन-किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤ साथ ही देंगे कà¥à¤› जरूरी टिपà¥à¤¸à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ यह सच है कि मां का दूध शिशॠके लिठसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® है?
वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° छह माह तक के शिशॠके लिठमां का दूध ही सबसे बेहतर होता है। इसे शिशॠके लिठसंपूरà¥à¤£ आहार माना गया है। इसमें करीब 400 तरह के पोषक ततà¥à¤µ होते हैं। मां के दूध में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ और रोग से लड़ने वाले यौगिक (कंपाउंड) शामिल होते हैं, जो फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध में नहीं होते हैं (1)।
अगर आप यह सोच रहे हैं कि शिशॠको दूध पिलाना कब से शà¥à¤°à¥‚ किया जाà¤, तो उसका जवाब हम यहां दे रहे हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ करने का सही समय कà¥à¤¯à¤¾ है?
डिलीवरी नॉरà¥à¤®à¤² और सीजेरियन दो तरह से होती है। यहां हम दोनों अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के बारे में ही बता रहे हैं कि शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कब से कराया जा सकता है (2) :
1. नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी
नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी में जनà¥à¤® के बाद पहले घंटे के à¤à¥€à¤¤à¤° ही शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाया जा सकता है।
2. सीजेरियन डिलीवरी
सीजेरियन डिलीवरी में महिला के होश में आने के बाद और उसके कà¥à¤› हद तक सà¥à¤¥à¤¿à¤° होने के बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ कराया जाता है। शà¥à¤°à¥‚ के कà¥à¤› दिन असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में मौजूद नरà¥à¤¸ इस काम में मां की मदद करती हैं।
आगे हम बता रहे हैं कि मां और शिशॠदोनों के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है।
मां को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लाà¤
यह तो सही है कि शिशॠके लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ सही है, लेकिन यह नई मां के लिठà¤à¥€ लाà¤à¤•ारी है (3):
जो माताà¤à¤‚ अपने शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती हैं, वह जलà¥à¤¦à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो सकती हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान निकलने वाले हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ अपने नियमित आकार में आ सकता है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से होने वाली बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग à¤à¥€ कम हो सकती है।
अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से सà¥à¤¤à¤¨ और ओवरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) की आशंका कम हो जाती है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² की समसà¥à¤¯à¤¾ कम हो सकती है।
इससे मां और शिशॠके बीच à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• संबंध मजबूत होता है और डिलीवरी के बाद किसी à¤à¥€ तरह का तनाव नहीं होता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मां को अपना वजन बढ़ाने या घटाने में मदद मिलती है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करना बेहद आसान है। फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध की तरह इसे बनाने या फिर बोतल धोने की जरूरत नहीं होती।
शिशॠको जब à¤à¥€ à¤à¥‚ख लगती है, आप उसे कहीं à¤à¥€ तà¥à¤°à¤‚त दूध पिला सकती हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लाà¤
शिशॠके लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ हर लिहाज से बेहतर है। जिन शिशà¥à¤“ं को जनà¥à¤® से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराया जाता है, उनके पहले वरà¥à¤· में बीमार होने की आशंका कम हो जाती है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से शिशॠको निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के लाठहो सकते हैं (3) :
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मां के दूध में कई तरह के पोषक ततà¥à¤µ होते हैं और इसे पचाना शिशॠके लिठआसान होता है।
शिशॠकी रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बेहतर होती है, जिस कारण आंतà¥à¤°à¤¶à¥‹à¤¥, निमोनिया, बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस, कान में संकà¥à¤°à¤®à¤£, मोटापा, à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ व डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से शिशॠविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह के संकà¥à¤°à¤®à¤£ खासकर आंतों व फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचा रहता है।
मां के दूध में पॉली अनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है, जो शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास के लिठजरूरी है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से शिशॠको जरूरी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मिलते हैं, जो शिशॠके पाचन तंतà¥à¤° में आने वाली सूजन, दरà¥à¤¦ या जलन से बचाते हैं।
जो शिशॠशà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ छह महीने तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करते हैं, उनके बीमार होने पर जलà¥à¤¦ ठीक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है।
मां जो कà¥à¤› à¤à¥€ खाती है, उससे मां के दूध का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बदल जाता है। इस कारण से शिशॠको अलग-अलग सà¥à¤µà¤¾à¤¦ की आदत शà¥à¤°à¥‚ से ही पड़ जाती है। इसका फायदा यह होता है कि छह माह बाद जब शिशॠको ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है, तो उसे खिलाना आसान हो जाता है।
आइà¤, अब यह जान लेते हैं कि शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ होती हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की सही अवसà¥à¤¥à¤¾
शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के कई तरीके होते हैं। आप सà¤à¥€ तरह की मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤“ं को आजमा कर देखें। फिर उस मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ को चà¥à¤¨à¥‡à¤‚, जो आपके व आपके शिशॠके लिठआरामदायक हो। आप सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लिठतकिये की मदद à¤à¥€ ले सकती हैं। यहां हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ ही मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤“ं के बारे में बता रहे हैं (4) :
1. कà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤² होलà¥à¤¡
इस पॉजिशन में आप कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ या पलंग पर सहारा लेकर बैठसकती हैं। आप शिशॠको जिस तरफ से दूध पिलाà¤, उसी तरफ के हाथ से शिशॠके रीà¥, गरà¥à¤¦à¤¨ और निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ को सहारा दें। अगर आपको शिशॠके नीचे तकिया रखना हो, तो वो à¤à¥€ रख सकती हैं। इसी तरह दूसरी तरफ से दूध पिलाते समय करें।
2. कà¥à¤°à¤¾à¤¸ कà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤² होलà¥à¤¡
इस पॉजिशन में आप अपने शिशॠको अगर दाईं तरफ से दूध पिला रही हैं, तो उसके सिर और शरीर को बाà¤à¤‚ हाथ से सहारा दें। हाथ से उसकी गरà¥à¤¦à¤¨ व सिर को पकड़ें और उसके मà¥à¤‚ह को सà¥à¤¤à¤¨ तक ले जाà¤à¤‚। इस मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में शिशॠका मà¥à¤‚ह निपà¥à¤ªà¤² से नहीं हटेगा और आराम से दूध पी सकेगा। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि इस दौरान शिशॠआराम से सांस ले सके। अगर आपका शिशॠसमय से पहले जनà¥à¤®à¤¾ है, तो यह पॉजिशन उसके लिठअचà¥à¤›à¥€ है। à¤à¤¸à¤¾ ही बाà¤à¤‚ ओेर से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराते समय करें।
3. फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² होलà¥à¤¡
फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² होलà¥à¤¡ की अवसà¥à¤¥à¤¾ कà¥à¤›-कà¥à¤› कà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤² होलà¥à¤¡ जैसी है। आप शिशॠके रीà¥, गरà¥à¤¦à¤¨ और निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ को सहारा दें और दूध पिलाते समय शिशॠकी पीठके नीचे तकिया रखें। इस दौरान धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि शिशॠकी नाक सà¥à¤¤à¤¨ से न दबे और वह सही तरह से सांस ले सके।
4. बगल में लेटाकर दूध पिलाना
इस पॉजिशन में आप शिशॠको लेटकर दूध पीला सकती हैं। जिस तरफ करवट करके आप लेती होती हैं, उसी तरफ से दूध पिला सकती हैं। इस दौरान आप शिशॠको सिर और पीठपर à¤à¥€ सहारा दे सकती हैं।
5. रिकà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¨à¤¿à¤‚ग पॉजिशन
इसे बायोलॉजिकल नरà¥à¤šà¤°à¤¿à¤‚ग à¤à¥€ कहते हैं। आप अपनी गरà¥à¤¦à¤¨, कंधे, हाथ और पीठके पीछे तकिया लगाकर बैठजाà¤à¤‚। इस पॉजिशन में आप आधी लेटी और बैठी अवसà¥à¤¥à¤¾ में होती हैं। अपने शिशॠको अपने पेट का सहार देकर अपने ऊपर लेटाठऔर उसके सिर को सà¥à¤¤à¤¨ तक ले आà¤à¤‚। अगर आपको बैठकर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराते हà¥à¤ कमर में दरà¥à¤¦ होता है, तो यह पॉजिशन सबसे बेहतर है।
आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के इस हिसà¥à¤¸à¥‡ में हम सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ जानकारियां दे रहे हैं।
नई मां के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के जरूरी टिपà¥à¤¸
नई माताओं के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने से संबंधी कई महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ टिपà¥à¤¸ हैं, जो आपके काम आ सकते हैं। नीचे à¤à¤¸à¥‡ ही कà¥à¤› टिपà¥à¤¸ के बारे में बताया गया है (5) :
पहचानें बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥‚खा है या नहीं :
अगर शिशॠअपना हाथ या आसपास का समान चाटने लगे।
अगर शिशॠकà¥à¤› चूसने लगे, तो à¤à¥€ वह à¤à¥‚खा हो सकता है।
अगर शिशॠआपके कंधे पर अपना सिर ऊपर नीचे करने लगे।
अगर शिशॠजोर-जोर से रोà¤, तो यह à¤à¥€ à¤à¥‚खे होने का संकेत हो सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के लिठलेटना या बैठना :
जब à¤à¥€ आप शिशॠको दूध पिलाà¤à¤‚, तब आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में रहें।
आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤¸à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ में लेकर बैठें, जिससे आपके हाथों और पीठमें दरà¥à¤¦ न हो।
आप तकिये से शिशॠको सहारा दे सकती हैं।
अरà¥à¤§-लेटी अवसà¥à¤¥à¤¾ में शिशॠको आराम से दूध पिलाने के लिठआपको पीठके बल लेटना होगा। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहते हà¥à¤ आप अपने हाथों से शिशॠको सहारा दे सकती हैं।
शिशॠको गोदी में लेकर à¤à¥€ दूध पिलाया जा सकता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आप अपनी गोदी में तकिया रखकर उस पर शिशॠको लेटा सकती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में शिशॠआराम से दूध पी सकेगा।
शिशॠमà¥à¤‚ह से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को ठीक से पकड़े :
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि शिशॠके मà¥à¤‚ह में निपà¥à¤ªà¤² आराम से चले जाà¤à¤‚।
इससे शिशॠआसानी से दूध पी सकेगा।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को सपोरà¥à¤Ÿ करना :
अगर शिशॠके दूध पीने पर आपको निपà¥à¤ªà¤² में दरà¥à¤¦ हो रहा हो, तो आप अपनी उंगली का सहारा ले सकती हैं।
इस तरह शिशॠसà¥à¤¤à¤¨ को सही पà¥à¤°à¤•ार से थाम लेगा और आराम से दूध पी सकेगा।
शिशॠके होंठकी पॉजिशन :
शिशॠका मà¥à¤‚ह मां के सà¥à¤¤à¤¨ के पास होना चाहिà¤à¥¤ इससे शिशॠके होंठकी पॉजिशन सही से बन पाà¤à¤—ी और वह आराम से दूध पी सकेगा।
अगर आपको नहीं पता कि शिशॠको कितना दूध पिलाना है, तो यह जानकारी आपके काम आà¤à¤—ी।
बचà¥à¤šà¥‡ को कब और कितना दूध पिलाना चाहिà¤?
शिशॠको जनà¥à¤® के बाद पहले चार हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में 24 घंटे में कम से कम 8-12 बार à¤à¥‚ख लग सकती है। इस दौरान शिशॠजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सोता है, इसलिठअगर वह सो à¤à¥€ रहा है, तो à¤à¥€ हर तीन घंटे में उसे उठाकर दूध पिलाना चाहिà¤à¥¤ पहले उसे à¤à¤• तरफ से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाà¤à¤‚। जब वह दूध पीना बंद कर दे, तो दूसरी तरफ से दूध पिलाà¤à¤‚। अगर वह à¤à¥‚खा होगा, तो दूसरी तरफ से à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जरूर करेगा। अमूमन शिशॠà¤à¤• बार में करीब 20 से 45 मिनट तक दूध पी सकते हैं (6)।
कैसे पता करें कि आपका शिशॠपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध पी रहा है?
किसी à¤à¥€ मां के लिठयह जानना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है कि उसका शिशॠà¤à¥‚खा है या नहीं। नीचे इससे जà¥à¥œà¥€ कà¥à¤› जानकारियां दी जा रही हैं (7) :
नरà¥à¤® सà¥à¤¤à¤¨ : अगर शिशॠको दूध पिलाने के बाद आपके सà¥à¤¤à¤¨ नरà¥à¤® लगें, तो इसका मतलब यह है कि शिशॠने परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध पी लिया है।
शांत शिशॠ: सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद अगर आपका शिशॠशांत है, तो आप समठजाà¤à¤‚ कि उसका पेट à¤à¤° चà¥à¤•ा है।
डायपर : अगर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के बाद शिशॠà¤à¤• दिन में कम से कम 6 बार डायपर गीला करता है, तो इसका मतलब यह है कि उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दूध मिल रहा है।
मल : जनà¥à¤® के बाद शिशॠà¤à¤• दिन में करीब तीन बार मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करता है। वहीं, पांच-सात दिन का होते-होते उसके मल का रंग हलà¥à¤•ा पीले रंग का हो जाता है। à¤à¤• माह का होते-होते शिशॠकी मल तà¥à¤¯à¤¾à¤—ने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कम हो जाती है और छह महीने का होने पर ठोस पदारà¥à¤¥ लेना शà¥à¤°à¥‚ करने पर फिर सामानà¥à¤¯ हो जाती है।
वजन : अगर शिशॠके चार महीने का होने तक हर हफà¥à¤¤à¥‡ करीब 200 गà¥à¤°à¤¾à¤® वजन बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध मिल रहा है।
कà¥à¤› महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का à¤à¥€ सामना करना पड़ता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान महिलाओं को होने वाली परेशानी?
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान महिलाओं को कई पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं, जिनमें से कà¥à¤› के बारे में हम यहां बता रहे हैं (8) :
सà¥à¤¤à¤¨ में दरà¥à¤¦ : कà¥à¤› महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान सà¥à¤¤à¤¨ में दरà¥à¤¦ हो सकता है। अगर शिशॠके दूध पीने के बाद आपको निपà¥à¤ªà¤² में दरà¥à¤¦ होता है, तो आप सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की पॉजिशन बदल सकती हैं।
निपà¥à¤ªà¤² फटना : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के पहले हफà¥à¤¤à¥‡ में निपà¥à¤ªà¤² फट सकते हैं। à¤à¤¸à¤¾ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव, साबà¥à¤¨ के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² या फिर मौसम में परिवरà¥à¤¤à¤¨ के कारण हो सकता हैं। कà¥à¤› महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के समय निपà¥à¤ªà¤² से खून à¤à¥€ आ सकता है। हालांकि, इससे शिशॠको नà¥à¤•सान नहीं होता, लेकिन आप अपने निपà¥à¤ªà¤²à¥‹à¤‚ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें और उन पर दूध सूखने न दें।
मासà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ : मासà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में टिशू में होने वाली सूजन है। यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के पहले 6-12 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के दौरान होती है। à¤à¤¸à¤¾ आमतौर पर संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध : à¤à¤¸à¤¾ शिशॠके कम दूध पीने, शिशॠका दूध पूरी तरह से न खींच पाने या फिर मां के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेहतमंद होने के कारण होता है। आप उंगली या अंगूठे की मदद से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को हलà¥à¤•ा-हलà¥à¤•ा दबाकर अतिरिकà¥à¤¤ दूध निकाल सकते हैं। साथ ही बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पंप का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ का सो जाना : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करते समय कà¥à¤› शिशॠसो जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में शिशॠको लगातार दूध पिलाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। इसका हल यह है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में सà¥à¤¤à¤¨ बदल-बदलकर दूध पिलाà¤à¤‚। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से शिशॠआराम से दूध पिà¤à¤—ा और सोà¤à¤—ा à¤à¥€ नहीं।
सà¥à¤¤à¤¨ में दूध न बनने की समसà¥à¤¯à¤¾ : कई महिलाà¤à¤‚ इस बात से चिंतित रहती हैं कि उनके सà¥à¤¤à¤¨ में दूध नहीं बन पाता। इसका कारण है शरीर में पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होना। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार खाने से सà¥à¤¤à¤¨ में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दूध बन सकता है।
आगे हम कामकाजी महिलाओं के लिठजरूरी बातें बता रहे हैं।
कामकाजी महिलाà¤à¤‚ कैसे अपने बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना जारी रख सकती हैं?
यहां हम कामकाजी महिलाओं के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के जरूरी टिपà¥à¤¸ दे रहे हैं (9) :
à¤à¤• दिन में लगà¤à¤— 2-3 बार पंप के जरिठअपने शिशॠके लिठदूध इकटà¥à¤ ा करके à¤à¥‡à¤œ सकती हैं। इसके लिठआप कà¥à¤› देर के लिठऑफिस में कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ रूम ले सकती हैं।
अगर आप शिशॠको अपने साथ ऑफिस लेकर जा रही हैं, तो काम के बीच में से टाइम निकालकर उसे शांत वातावरण में दूध पिला सकती हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लिठकà¥à¤› खास चीजों की जरूरत होती है। यहां हम उसी बारे में बता रहे हैं।
बेहतर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ अनà¥à¤à¤µ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• चीजों की सूची
कà¥à¤› चीजों की मदद से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाना शिशॠऔर आपके लिठसà¥à¤–दायी हो सकता है। नीचे à¤à¤¸à¥€ ही कà¥à¤› चीजों के बारे में बताया जा रहा है।
कम से कम दो नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग बà¥à¤°à¤¾ खरीदें, जो आपके नाप की और आरामदायक होनी चाहिà¤à¥¤
नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग बà¥à¤°à¤¾ में लगे फà¥à¤²à¥ˆà¤ª पूरी तरह से खà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाले होने चाहिà¤à¥¤ अगर यह पूरी तरह से नहीं खà¥à¤²à¥‡à¤‚गे, तो सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर दबाव पड़ सकता है और नसों में रà¥à¤•ावट आने से मासà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से रिसाव हो सकता है, इसलिठअपने पास हमेशा बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पैड (डिसà¥à¤ªà¥‹à¤œà¥‡à¤¬à¤²) रखें।
रात में सोने के हिसाब से हलà¥à¤•ी नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग बà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ खरीदें, ताकि आप सोते समय उसमें बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पैड लगाकर सो पाà¤à¤‚।
अगर आप अपने सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध निकालकर शिशॠको पिलाना चाहती हैं, तो आपको बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पंप खरीदना होगा।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बारे में मिथक
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बारे में कà¥à¤› लोगों के मन में कई तरह के मिथक होते हैं। ये मिथक कितने सही हैं और कितने गलत हैं, यहां हम उसी के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
मिथक : अगर आप अपने सिर को धोने के बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती हैं, तो शिशॠको सरà¥à¤¦à¥€-खांसी हो सकती है।
तथà¥à¤¯ : यह सोचना गलत है। सरà¥à¤¦à¥€-खांसी सिरà¥à¤« संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होती है।
मिथक : सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के आकार से शरीर में उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ दूध की मातà¥à¤°à¤¾ पर फरà¥à¤• पड़ता है।
तथà¥à¤¯ : मांसपेशियों (फैटी टिशू) की वजह से सà¥à¤¤à¤¨ छोटे या बड़े होते हैं। इसका दूध की मातà¥à¤°à¤¾ पर कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता है।
मिथक : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मां को अधिक दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने के लिठअधिक खाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
तथà¥à¤¯ : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मां को अधिक दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने के लिठसंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤¾ खाना चाहिà¤à¥¤ इससे मां न सिरà¥à¤« सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहेगी, बलà¥à¤•ि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध à¤à¥€ बन सकेगा।
मिथक : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मां गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ नहीं होगी।
तथà¥à¤¯ : बेशक, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली महिला में पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कम होती है, लेकिन वह गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हो सकती है।
मिथक : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने से सà¥à¤¤à¤¨ शिथिल हो जाते हैं।
तथà¥à¤¯ : उमà¥à¤° बढ़ने के साथ-साथ और शरीर में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कम होने से सà¥à¤¤à¤¨ शिथिल होने लगते हैं।
मिथक: शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के अलावा पानी की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
तथà¥à¤¯: मां के दूध में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पानी होता है, इसलिठछह माह तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के अलावा शिशॠको किसी और चीज की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती है।
मिथक : परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध न मिलने के कारण नवजात रोता है।
तथà¥à¤¯ : अगर शिशॠको तेज à¤à¥‚ख लगती है, तो वह परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध न मिलने पर रो सकता है। इसके अलावा, शिशॠके रोने के कई अनà¥à¤¯ कारण à¤à¥€ हो सकते हैं जैसे – शरीर में किसी पà¥à¤°à¤•ार की असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¥¤
अकà¥à¤¸à¤° पूछे जाने वाले सवाल
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान शिशॠको गाय का दूध पिलाना सही है?
नहीं, शिशॠको 6 माह का होने तक मां के दूध के अलावा कà¥à¤› और नहीं देना चाहिà¤à¥¤ गाय के दूध में फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है, जिससे शिशॠको हाइपोकैलà¥à¤¸à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ हो सकता है। इसलिà¤, à¤à¤• वरà¥à¤· बाद ही शिशॠको गाय का दूध देना चाहिठ(10)।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मां के लिठधूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करना, शराब पीना या दवाओं का सेवन करना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
अगर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान मां धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करती है, शराब पीती है या दवाइयों का सेवन करती है, तो इससे शिशॠको नà¥à¤•सान हो सकता है। इन चीजों का थोड़ा बहà¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¤¾ मां के दूध के साथ शिशॠके अंदर चला जाता है (11)।
कà¥à¤¯à¤¾ शिशॠको लेटकर दूध पिलाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
हां, लेटकर शिशॠको दूध पिलाया जा सकता है। इस मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के बारे में हमने ऊपर लेख में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताया है।
कà¥à¤¯à¤¾ सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के तà¥à¤°à¤‚त बाद मां अपने शिशॠको दूध पिला सकती है?
सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद मां के पूरी तरह से होश में आने और सà¥à¤¥à¤¿à¤° होने के बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराया जा सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ मैं सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवा सकती हूं?
सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• जगहों पर à¤à¥€ आप अपने शिशॠको दूध पीला सकती हैं। शिशॠको जब à¤à¥€ à¤à¥‚ख लगे, जहां à¤à¥€ à¤à¥‚ख लगे, आपको उसे दूध पिलाने का पूरà¥à¤£ अधिकार है।
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